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स्कूलों में पाेषाहार बनाने वाली 3115 महिलाओं काे 9 माह का 3 .70 करोड़ रु का अब तक नहीं हुआ भुगतान

जिलेभर की सरकारी स्कूलाें में विद्यार्थियों के लिए पोषाहार बनाने वाली महिलाएं शिक्षा विभाग की उदासीनता के चलते परेशानी का सामना कर रही हैं। मिड-डे मील की सरकारी योजना में कार्यरत इन कुक कम हेल्पर को 9 माह से मानदेय नहीं दिया गया है। आर्थिक किल्लत की वजह से इन महिलाओं के घराें में चूल्हा तक जलाना मुश्किल हाे रहा है। लॉकडाउन लगने के साथ ही सरकार द्वारा स्कूलों का अवकाश घोषित कर दिया गया। इसके बाद से लगातार मानदेय का भुगतान नहीं हाे पाया है।

जिलेभर के सरकारी स्कूलाें में पाेषाहार बनाने वाली 3115 महिलाओं काे 1320 रुपए के प्रति माह के हिसाब से 9 माह का करीब 3 कराेड़ 70 लाख रुपए का अभी तक भुगतान नहीं हाे पाया है। इसके चलते ये सभी महिलाएं अपने परिवार के भरण-पाेषण में आर्थिक परेशानी का सामने कर रही हैं। इन महिलाओ के अनुसार इन्हें मानदेय का भुगतान नहीं हाेने के चलते ये अपने घर राशन सामग्री का सामान व अपने बच्चाें की फीस सहित अन्य खर्चाें का भुगतान नहीं कर पा रही हैं। कुक कम हैल्पर सराेज बताती हैं कि सरकारी स्कूलों में पोषाहार पकाने वाली महिलाओं को मार्च महीने तक का वेतन दिया गया है। इसके बाद लॉकडाउन लगने व स्कूल नहीं खुलने के कारण अल्प वेतनभोगी कुक कम हेल्पर को मानदेय नहीं दिया गया है, जिससे हजाराें परिवारों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है। अब पता नहीं यह वेतन कब और कैसे मिल पाएगा।

15 अगस्त 1995 से मिड-डे-मील व्यवस्था शुरू की गई, मार्च के अंतिम सप्ताह से बंद हुए स्कूलों के ताले बच्चों के लिए अभी तक नहीं खुले हैं

अधिकारियाें के मुताबिक सरकारी विद्यालयों में 15 अगस्त 1995 से मिड-डे-मील की शुरुआत की गई थी। इस याेजना का मुख्य उद्देश्य सरकारी विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने, उपस्थिति में वृद्धि, ड्रॉपआउट रोकने, शिक्षा के स्तर को बढ़ावा देने सहित विद्यार्थियों के पोषण में वृद्धि करना है। इसके तहत शहरी समेत सभी ग्रामीण क्षेेत्रों के विद्यालयों में पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को मध्यांतर में पोषाहार खिलाया जाता है। इसके तहत पहली से पांचवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को 450 ग्राम कैलोरी व 12 ग्राम प्रोटीन व छठी से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को 700 ग्राम कैलोरी व 20 ग्राम प्रोटीन उपलब्ध कराने के सरकार के निर्देश हैं। जहां कुक कम हेल्पर महिलाओं को मार्च तक का मानदेय मिला। इसके बाद से सरकारी स्कूलों में पोषाहार बनाने वाली महिलाएं अप्रैल से नवंबर माह तक का मानेदय पाने के लिए महिलाएं लंबा इंतजार करने काे मजबूर हैं। लेकिन विभाग इस ओर काेई ध्यान देने काे तैयार नहीं है।


मार्च के अंतिम सप्ताह से बंद हुई स्कूलों के ताले बच्चों के लिए अभी तक नहीं खुले हैं, जिससे कुक कम हेल्पर को वेतन भी नहीं दिया गया है। सरकार की ओर से हर महीने इन कुक कम हेल्पर को बहुत ही कम राशि मानदेय के रूप में दी जाती थी। इससे इन महिलाओं का घर चलता था लेकिन पिछले 9 महीने से सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। विभाग के अनुसार इन महिलाओं के लिए मानदेय का बजट आ चुका है लेकिन केंद्र व राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में अभी तक काेई आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं। इससे जिलेभर में कार्यरत 3115 महिलाओं के परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। कोरोना काल में स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों तक अनाज पहुंचाया गया है। लेकिन स्कूल में पोषाहार पकाने वाली महिलाओं की तरफ ध्यान ही नहीं दिया गया है।


आपकाे बता दें कि प्रति महिला 1320 रुपए प्रति माह के हिसाब से 9 माह का करीब 11800 रुपए से अधिक बकाया है। कुक कम हेल्पर पुष्पा बताती हैं कि 9 महीने से वेतन नहीं मिला है। इससे घर की आर्थिक स्थिति पूरी तरह से खराब हो गई है। पहले से ही वेतन काफी कम है, ऊपर से कोरोना की वजह से स्कूलाें में बच्चाें का आना बंद हाेने से पोषाहार भी नहीं पक रहा है। लेकिन सरकार की ओर से बच्चों को सूखा अनाज पहुंचाया जा रहा है तो हमारी तरफ भी ध्यान देकर हमें भी वेतन देना चाहिए, जिससे हमें व हमारे परिवार को संबल मिल सकेगा। बिना पैसे से घर का गुजारा तक मुश्किल हो गया है। सरकार काे हम सभी के साथ हमारे परिवार काे ध्यान में रख कर जल्द से जल्द राहत प्रदान करनी चाहिए।

जिलेभर की सरकारी स्कूलाें में पोषाहार पकाने वाली कुक कम हेल्पर महिलाओं के मानदेय के संबंध में कोई भी दिशा निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। इन्हें मार्च तक का वेतन दे दिया गया है। उसके बाद स्कूल नहीं खुले हैं तो वेतन भी नहीं दिया गया है। हालांकि स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों को सूखा अनाज भिजवाया जा रहा है। आगामी आदेश तक उन्हें सूखा अनाज ही पहुंचाया जाएगा। इन महिलाओं के मानदेय के भुगतान संबंधी आदेश मिलते हैं ताे तुरंत प्रभाव से भुगतान कर दिया जाएगा।
हंसराज यादव, कार्यवाहक डीईओ, माध्यमिक व प्रारंभिक श्रीगंगानगर



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Rs. 3.70 crore for 9 months of 3115 women making non-vegetarian in schools has not yet been paid


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